धनबाद। वर्ल्ड हार्ट डे के अवसर पर शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस.के. पाठक ने हृदय रोगों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले हार्ट की बीमारी 40-50 साल की उम्र के बाद होती थी, लेकिन अब 19-20 साल के युवाओं में भी हार्ट अटैक, शुगर और बीपी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण गलत खान-पान और जीवनशैली है।
डॉ. एस.के. पाठक ने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से सीएमआरआई के सामने प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी फास्ट फूड के आदी हो गए हैं। बर्गर, पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड के कारण कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल और मोटापा बढ़ रहा है, जो सीधे दिल पर असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए सादा भोजन, मॉर्निंग वॉक, नियमित व्यायाम और योगा को दिनचर्या में शामिल करना बहुत जरूरी है। साथ ही चिंता और तनाव से बचना चाहिए, क्योंकि तनाव भी हार्ट अटैक का बड़ा कारण है। हार्ट अटैक के लक्षणों के बारे में बताते हुए डॉक्टर ने कहा कि सीने में दर्द, चलते समय सीने में भारीपन या सांस फूलना इसके मुख्य लक्षण हैं। लेकिन शुगर के मरीजों में कई बार बिना किसी लक्षण के भी साइलेंट हार्ट अटैक हो जाता है, जो और भी खतरनाक है। डॉ. साहब ने विशेष रूप से बताया कि शुगर और हार्ट का सीधा संबंध है। शुगर होने पर हार्ट अटैक का खतरा चार गुना तक बढ़ जाता है। इसलिए 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को नियमित रूप से बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि वर्ल्ड हार्ट डे पर सभी लोग अपने दिल के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
