धनबाद। मिथिला की समृद्ध संस्कृति और परंपरा को जीवंत रखने के उद्देश्य से सखी बहिनापा मैथिलानी समूह, धनबाद इकाई द्वारा रविवार को कुसुम विहार स्थित डेस्टिनी मैरिज हॉल में “मिथिलांचल मधुश्रावणी विशेष सावन महोत्सव” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नवविवाहिताओं ने पारंपरिक विधि-विधान से मधुश्रावणी पर्व मनाया। सखी बहिनापा मैथिलानी समूह मैथिल महिलाओं का सबसे बड़ा संगठन है जो मिथिला में नारी सशक्तिकरण के साथ-साथ मिथिला की सांस्कृतिक, साहित्यिक, सामाजिक और भौगोलिक एकता के लिए लगातार काम कर रहा है। धनबाद इकाई द्वारा आयोजित यह महोत्सव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास था। कार्यक्रम स्थल को मिथिला की संस्कृति के रंगों से सजाया गया था। यहां मिथिला के खान-पान, शादी में उपयोग होने वाली सामग्री, मिथिला चित्रकला, जनेऊ, सिक्की कला, दोपट्टा और पाग के विशेष स्टॉल लगाए गए थे। स्टॉलों पर मिथिलांचल की पारंपरिक वस्तुओं को देखकर उपस्थित लोगों को मिथिला की झलक मिली।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक मिथिला गीतों से हुई। इसके बाद मधुश्रावणी विशेष गीत, झिझिया और कजरी नृत्य तथा विद्यापति गीतों की सामूहिक प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम की सबसे बड़ी आकर्षण फूलडाली सज्जा प्रतियोगिता और रैंप वॉक रही, जिसमें नवविवाहिताओं ने पारंपरिक मिथिला परिधानों में हिस्सा लिया।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
आयोजकों ने बताया कि मधुश्रावणी पर्व मिथिला क्षेत्र में नवविवाहित महिलाओं द्वारा सावन के महीने में मनाया जाने वाला एक विशेष त्योहार है। यह पर्व प्रेम, विश्वास और पारंपरिक मूल्यों का प्रतीक है। इस प्रतियोगिता और आयोजन का उद्देश्य आधुनिकता के साथ सामंजस्य बिठाते हुए अपनी प्राचीन परंपरा और संस्कृति का संरक्षण करना है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में झरिया विधायक रागिनी सिंह, डॉ. दीक्षा झा, डॉ. जयंती कश्यप और डॉ. ईशा रानी उपस्थित थीं। उन्होंने मिथिला संस्कृति को जीवित रखने के लिए सखी बहिनापा समूह के प्रयासों की सराहना की।
डांस दीझा झा और डेंटल क्लिनिक का सहयोग
इस आयोजन को सफल बनाने में डांस दीझा झा और आविष्कार डेंटल क्लिनिक का विशेष सहयोग रहा। संस्था को क्लिनिक की ओर से 15,000 रुपये की सहयोग राशि प्रदान की गई। सखी बहिनापा धनबाद इकाई ने इसके लिए आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम में रूबी खान, रंजू झा, रीता मिश्रा, विनीता चौधरी, प्रीति ठाकुर, बेला झा, सुनीता झा, पूनम झा, सीमा झा, लीना झा, नेहा झा, स्वाती झा, प्रियंका झा, रानी झा, अनामिका झा कंचन झा सहित 100 से अधिक सक्रिय सखियां मौजूद थीं। सखियों ने कहा कि “सखी बहिनापा धनबाद समूह मिथिलांचल की विलक्षण परंपरा को अक्षुण्ण रखने का दूसरा नाम है।” उन्होंने संकल्प लिया कि वे आगे भी मिथिला की भाषा, कला और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करती रहेंगी। कार्यक्रम का समापन सामूहिक भजन और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

