एमएमडीआर संशोधन की मांग को लेकर जंगलपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मोकीम अंसारी ने सरकार से किया मांग ।
गोबिंदपुर । एमएमडीआर संशोधन कानून 2026 को लेकर जहां एक तरफ कई संगठन विरोध में महाधरना की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गोबिंदपुर प्रखंड के जंगलपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मोकीन अंसारी ने इस कानून में संशोधन की मांग को लेकर सरकार से पहल करने की मांग की है।
मुखिया प्रतिनिधि मोकीम अंसारी ने कहा कि खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम 2026 झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों में सुधार की जरूरत है ताकि स्थानीय रैयतों, ग्रामीणों और पंचायतों के हितों की अनदेखी न हो।
उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती खनिज संपदा से भरी हुई है, लेकिन आज भी खनन प्रभावित क्षेत्रों के गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। खनन से सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीण होते हैं, उनकी जमीन जाती है, पर्यावरण प्रभावित होता है, लेकिन लाभ का बड़ा हिस्सा कंपनियों और बाहर के लोगों को मिलता है। इसलिए एमएमडीआर कानून में ऐसा प्रावधान होना चाहिए जिससे स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिल सके। मोकिम अंसारी में कहां की किसी भी खनन पट्टा आवंटन या नीलामी से पहले संबंधित पंचायत की ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य की जाए। बिना ग्राम सभा के कोई भी खनन कार्य शुरू न हो।रॉयल्टी में हिस्सेदारी: खनिजों से मिलने वाली रॉयल्टी का 30 प्रतिशत हिस्सा सीधे प्रभावित पंचायतों के विकास के लिए दिया जाए। इस राशि से गांव में सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा विकसित की जाए।
स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता: खनन कंपनियों में 75 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय विस्थापितों, रैयतों और आदिवासी-मूलवासी युवाओं को दी जाए। खनन के कारण खराब हुई जमीन को फिर से कृषि योग्य बनाने और वृक्षारोपण के लिए सख्त नियम बनाए जाएं। डीएमएफटी फंड का सही उपयोग: डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट फंड का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो और इसकी निगरानी के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
मोकीम अंसारी ने कहा कि जंगलपुर पंचायत सहित पूरे धनबाद क्षेत्र में कोयला खनन का बड़ा असर है। यहां बीसीसीएल की कई खदानें हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। खदानों से उड़ने वाले डस्ट से लोगों को सांस की बीमारी हो रही है, पानी का जलस्तर नीचे जा रहा है। ऐसे में अगर कानून में संशोधन कर स्थानीय हितों को प्राथमिकता नहीं दी गई तो आने वाले समय में विस्थापन और पलायन की समस्या और बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि उन्होंने इस संबंध में झारखंड के मुख्यमंत्री, खान सचिव और धनबाद के उपायुक्त से मांग की है कि एमएमडीआर संशोधन कानून 2026 पर पुनर्विचार करते हुए इसमें झारखंड के आदिवासी, मूलवासी और ग्रामीण हितों को ध्यान में रखते हुए जरूरी बदलाव किए जाएं। उन्होंने आगे कहा कि उनका विरोध खनन या विकास का नहीं है, बल्कि विकास में स्थानीय भागीदारी सुनिश्चित करने का है। अगर पंचायतों को मजबूत किया जाएगा, ग्राम सभा को अधिकार दिया जाएगा तभी सही मायने में झारखंड का विकास होगा। इस मौके पर उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे 7 सितंबर को एकजुट होकर एमएमडीआर कानून में जनहित से जुड़े संशोधनों की मांग सरकार के समक्ष रखें ताकि झारखंड के खनिज संसाधनों का लाभ झारखंड के लोगों को ही मिल सके।
